ग्रामीण इलाकों में रहने वाली महिलाओं के लिए अपनी आमदनी बढ़ाने और खुद का काम शुरू करने का अच्छा अवसर है। केंद्र सरकार की लखपति दीदी पहल के जरिए स्वयं सहायता समूहों (SHG) से जुड़ी महिलाओं को कारोबार की जानकारी, जरूरी प्रशिक्षण, बैंक से ऋण और बाजार तक पहुंच बनाने में मदद दी जाती है। इसका लक्ष्य महिलाओं की आमदनी को लगातार बढ़ाकर सालाना कम से कम ₹1 लाख तक पहुंचाना है।
लखपति दीदी योजना 2026 क्या है?
लखपति दीदी कोई अलग से नकद राशि बांटने वाली योजना नहीं है। यह केंद्र सरकार के दीनदयाल अंत्योदय योजना–राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (DAY-NRLM) के तहत चलाई जा रही एक पहल है। इसके माध्यम से ग्रामीण महिलाओं को स्वयं सहायता समूहों से जोड़कर उनकी आजीविका और छोटे कारोबार को मजबूत किया जाता है।
सरकारी परिभाषा के अनुसार, ऐसी स्वयं सहायता समूह सदस्य महिला जिसकी घरेलू सालाना आमदनी कम से कम ₹1 लाख हो और यह आमदनी चार कृषि मौसमों या चार कारोबारी चक्रों तक बनी रहे, उसे लखपति दीदी माना जाता है। यानी केवल एक बार ₹1 लाख कमा लेना इसका उद्देश्य नहीं है, बल्कि नियमित आमदनी तैयार करना है।
2026 में लखपति दीदी योजना का नया अपडेट
ग्रामीण विकास मंत्रालय की ओर से 28 जुलाई 2026 को जारी जानकारी के अनुसार, देश में DAY-NRLM के तहत लगभग 92 लाख स्वयं सहायता समूहों से 10.08 करोड़ ग्रामीण परिवार जुड़ चुके थे। इनमें से 3.46 करोड़ से अधिक स्वयं सहायता समूह सदस्यों को लखपति दीदी बनने में सक्षम बनाया जा चुका था।
सरकार महिलाओं को केवल आर्थिक सहायता देने तक सीमित नहीं है। उन्हें कारोबार चलाने, हिसाब-किताब रखने, बैंकिंग सेवाओं का इस्तेमाल करने और अपने उत्पादों को बाजार तक पहुंचाने के लिए भी सहायता दी जा रही है।
लखपति दीदी योजना में महिलाओं को क्या-क्या लाभ मिलते हैं?

इस पहल के तहत मिलने वाली मदद महिला के स्वयं सहायता समूह, उसके कारोबार और संबंधित कार्यक्रम की पात्रता पर निर्भर करती है।
1. स्वयं सहायता समूह को रिवॉल्विंग फंड
पात्र स्वयं सहायता समूहों को लगभग ₹20,000 से ₹30,000 तक का रिवॉल्विंग फंड दिया जा सकता है। इसका इस्तेमाल समूह की आंतरिक उधारी और सदस्यों की जरूरतों के लिए किया जाता है।
2. कम्युनिटी इन्वेस्टमेंट फंड (CIF)
स्वयं सहायता समूहों और उनके संघों के माध्यम से कारोबार और आजीविका से जुड़ी जरूरतों के लिए आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जाती है। सरकारी पोर्टल पर प्रति पात्र SHG अधिकतम ₹2.50 लाख तक CIF का प्रावधान बताया गया है। यह राशि सीधे हर महिला के निजी बैंक खाते में मिलने वाला अनुदान नहीं है।
3. बैंक से बिना गारंटी ऋण
पात्र स्वयं सहायता समूहों को बैंक से बिना गारंटी के ₹20 लाख तक ऋण उपलब्ध कराने की व्यवस्था है। ऋण की मंजूरी समूह की स्थिति, बैंक के नियमों और संबंधित शर्तों पर निर्भर करती है। इसे मुफ्त पैसा नहीं समझना चाहिए, क्योंकि ऋण वापस करना होता है।
4. कारोबार शुरू करने और बढ़ाने में मदद
महिलाएं खेती, पशुपालन, खाद्य प्रसंस्करण, सिलाई, हस्तशिल्प, छोटी दुकान, सेवा कारोबार और दूसरे स्थानीय कामों से जुड़ सकती हैं। उन्हें कारोबार की योजना बनाने और उसे आगे बढ़ाने में प्रशिक्षण व मार्गदर्शन भी दिया जाता है।
5. उत्पाद बेचने के लिए बाजार
सरकार स्वयं सहायता समूहों के उत्पादों को बाजार तक पहुंचाने के लिए सरस आजीविका, सरस मेले और eSaras जैसे माध्यमों को बढ़ावा देती है। इसके अलावा कुछ ऑनलाइन बाजारों से भी जुड़ाव कराया गया है।
लखपति दीदी योजना के लिए पात्रता क्या है?
इस पहल का मुख्य आधार ग्रामीण महिलाओं का स्वयं सहायता समूह से जुड़ना है। संभावित लाभार्थियों की पहचान के लिए सरकारी पोर्टल पर कुछ मार्गदर्शक मानदंड दिए गए हैं।
- महिला ग्रामीण क्षेत्र की निवासी हो और स्वयं सहायता समूह की सदस्य हो।
- संभावित लाभार्थी के रूप में पहचान के लिए समूह की कम से कम दो साल की सदस्यता और कम्युनिटी इन्वेस्टमेंट फंड का लाभ लेने जैसे मानदंड बताए गए हैं।
- मिशन के तहत आजीविका से जुड़ी सहायता प्राप्त कर रही हो।
- कम से कम दो तरह की आजीविका गतिविधियों में शामिल हो।
ध्यान रखें कि ये संभावित लाभार्थियों की पहचान के लिए सुझाए गए मानदंड हैं। राज्यों को अपनी जरूरत के अनुसार अतिरिक्त नियम तय करने की छूट है। इसलिए अंतिम पात्रता की जानकारी अपने राज्य के ग्रामीण आजीविका मिशन से जरूर लें।
लखपति दीदी योजना में आवेदन कैसे करें?
इस पहल में लाभ लेने के लिए सामान्य तौर पर स्वयं सहायता समूह और ग्रामीण आजीविका मिशन के माध्यम से जुड़ना होता है। इसके लिए आप ये कदम उठा सकती हैं:
- सबसे पहले अपने गांव में चल रहे स्वयं सहायता समूह की जानकारी लें।
- यदि आप किसी समूह से नहीं जुड़ी हैं, तो ग्राम संगठन या संबंधित ग्रामीण आजीविका मिशन कार्यालय से सदस्यता की प्रक्रिया पूछें।
- समूह की सदस्य बनने के बाद नियमित बैठकों और बचत से जुड़े नियमों का पालन करें।
- अपने समूह के माध्यम से आजीविका गतिविधि या छोटा कारोबार शुरू करने की योजना बताएं।
- जरूरत के अनुसार प्रशिक्षण, बैंक ऋण या उपलब्ध फंड के लिए समूह और मिशन के अधिकारियों से जानकारी लें।
- संबंधित अधिकारी आपकी पात्रता और कारोबार की योजना के आधार पर आगे की प्रक्रिया समझाएंगे।
जरूरी बात: केवल किसी वेबसाइट पर फॉर्म भरने से लखपति दीदी का लाभ अपने आप नहीं मिलता। इस पहल में महिलाओं की पहचान और सहायता की प्रक्रिया स्वयं सहायता समूह तथा ग्रामीण आजीविका मिशन के जरिए होती है।
आवेदन के लिए किन दस्तावेजों की जरूरत पड़ सकती है?
समूह में सदस्यता, बैंकिंग और आजीविका सहायता के लिए आम तौर पर इन दस्तावेजों की जरूरत पड़ सकती है:
- आधार कार्ड
- बैंक खाते की पासबुक
- मोबाइल नंबर
- निवास से जुड़ा प्रमाण
- स्वयं सहायता समूह की सदस्यता से जुड़े विवरण
- कारोबार या आजीविका योजना की जानकारी
दस्तावेजों की अंतिम सूची राज्य और सहायता के प्रकार के अनुसार अलग हो सकती है। आवेदन या ऋण प्रक्रिया शुरू करने से पहले संबंधित अधिकारी से इसकी पुष्टि कर लें।
लखपति दीदी योजना 2026: अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
1. क्या लखपति दीदी योजना में ₹1 लाख सीधे मिलते हैं?
नहीं। ₹1 लाख इस पहल के तहत तय किया गया सालाना घरेलू आमदनी का लक्ष्य है। हर महिला को सीधे ₹1 लाख देने का प्रावधान नहीं है।
2. क्या शहर में रहने वाली महिलाएं इस पहल का लाभ ले सकती हैं?
DAY-NRLM मुख्य रूप से ग्रामीण गरीब परिवारों और ग्रामीण स्वयं सहायता समूहों पर केंद्रित है। शहरी क्षेत्रों के लिए अलग आजीविका मिशन और नियम हो सकते हैं।
3. लखपति दीदी बनने के लिए क्या स्वयं सहायता समूह से जुड़ना जरूरी है?
हां, इस पहल का मुख्य आधार स्वयं सहायता समूह की सदस्य महिलाएं हैं। समूह के माध्यम से ही प्रशिक्षण, आजीविका सहायता और बैंक से जुड़ाव की प्रक्रिया आगे बढ़ती है।
4. लखपति दीदी योजना की जानकारी कहां मिलेगी?
आप आधिकारिक वेबसाइट lakhpatididi.gov.in पर जानकारी देख सकती हैं। इसके अलावा अपने गांव के स्वयं सहायता समूह, ग्राम संगठन या ब्लॉक स्तर के ग्रामीण आजीविका मिशन कार्यालय से संपर्क कर सकती हैं।